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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और विवादों का पुराना रिश्ता है। लेकिन इस बार विवाद की वजह बनी है, उनकी स्वर्ण मंदिर की यात्रा। इस बार वो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेवादार बन कर बर्तनों को धोने की वजह से विवादों में घिरे है। पूरा विवाद 3 जुलाई को अमृतसर में अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में जारी पार्टी का चुनावी घोषणापत्र और आप नेता आशीष खेतान के घोषणापत्र की तुलना गीता, बाइबल, गुरु ग्रन्थ साहिब जैसे धार्मिक ग्रंथों से करने और उसमें स्वर्ण मंदिर के साथ आप के चुनाव चिन्ह झाड़ू की तस्वीर लगने के बाद उठे विवाद का है।

KEJARIWAL

लेकिन एक विवाद से पीछा छुड़ाने के लिए केजरीवाल ने यहां दूसरा विवाद खड़ा कर दिया। दरअसल सेवा देने के लिए केजरीवाल ने जिन बर्तनों को साफ किया असल में वो पहले से ही साफ थे। यानी साफ बर्तन को ही साफ करके केजरीवाल भूल की माफी के लिए अपनी सेवा देने का दिखावा कर रहे थे जिसके बाद केजरीवाल एक बार फिर विरोधियो के निशाने पर है भाजपा ने कहा है कि पहले तो केजरीवाल ने सिख गुरुओं का अपमान किया इसके बाद फिर से धोये हुए बर्तन फिर से धोकर अपने अपराध को फरेब से छिपाने की कोशिश की है।

गायक एवं भाजपा नेता मनोज तिवारी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हम लोग तो गीत संगीत से जुड़े कलाकार हैं लेकिन केजरीवाल अलग तरह के कलाकार हैं। जो दिल्ली के लोगों को उनकी परेशानियों के साथ छोड़कर पता नहीं कहां चले जाते हैं और जगह जगह अपने कला को दिखने का प्रयत्न करते रहते है।

सोशल मीडिया भी केजरीवाल की खिंचाई करने में पीछे नहीं रहा। #केजरी_का_धर्म_धोखा सुबह ट्वीटर पर टॉप ट्रेंडिंग में था। महक लिखती हैं

एक यूजर सीमा का मानना है कि

बहरहाल, हम इस बारे में इतना तो कह सकते हैं कि केजरीवाल राजनैतिक चालें तो चतुराई भरी चलते हैं लेकिन दिक्कत यह है कि वह अपनी ही चाल में फंस जाते हैं। ऐसे में उन्हें जरुरत है ऐसी ईमानदारी की, जिसे किसी को दिखाने की जरुरत न पड़े।

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