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शुक्रवार 16 सितम्बर को मुद्दा में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान पर चर्चा हुई। जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के वरिष्ठ तथा अनुभवी लोगों ने हिस्सा लिया। इन लोगों में डा0 हिलाल नकवी ( प्रवक्ता यूपी कांग्रेस), मोहसिन रजा (नेता बीजेपी ), गोविंद पंत राजू (एपीएन न्यूज के सलाहकार संपादक)ऋतु सिंह (बसपा) शामिल थे।

समाजवादी पार्टी में चल रहा सियासी घमासान अब लगता है अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। आज लखनऊ में मुलायम सिंह यादव के आवास पर पूरा परिवार जुटा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव के साथ मुलायम सिंह यादव ने बैठक की और पूरे मामले पर दोनों के साथ आमने-सामने बातचीत की। मुलायम के घर पर पंचायत के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वहां से निकल गए हैं जबकि शिवपाल सिंह यादव अभी मुलायम के घर पर ही मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान समझौते का फार्मूला तैयार हो गया है। सूत्रों के मुताबिक शिवपाल सिंह यादव के सभी विभाग वापस होंगे साथ ही वो प्रदेश अध्यक्ष भी बने रहेंगे। हालांकि विधानसभा चुनाव में टिकट बांटने का अधिकार अखिलेश के पास रहेगा। फॉर्मूले को लेकर सीएम के सरकारी आवास पर कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। गायत्री प्रजापति को भी मंत्री बनाने के लिए दोबारा शपथ ग्रहण करवानी होगी।

चर्चा में बोलते हुए डा0 हिलाल नकवी ने कहा  सबकुछ पार्टी के अंदर है तब इतना उठा-पठक हुआ है। अगर सब कुछ ठीक नहीं होता शायद वहां दंगल ही हो गया होता। ये कहा जाना कि अखिलेश यादव की चलती नहीं है, उन पर परिवार भारी है ऐसा कुछ भी नहीं है। हम पार्टी और सरकार को मिक्स कर रहे है। अभी तक के झगड़े पार्टी के अंदर हुए है।

मोहसिन रजा ने कहा ये तय हो गया कि समाजवादी पार्टी का नेता अगर कोई है तो वो अखिलेश यादव है यह उन्होंने तय कर दिया। आपने ये बता दिया कि आपके लिए जनता नहीं अखिलेश और घर पहले है। ऐसा लगने लगा है कि शिवपाल सिंह यादव सियासत से संन्यास लेकर एक पार्टी बना दे और एक पार्टी खड़ी कर अपने बेटे को उसका मुखिया बना दे।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की हैसियत एक स्वतंत्र मुख्यमंत्री जैसी नहीं है। इस फैसले से ये बात सामने आयी है। ये कहना कि अखिलेश यादव को फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिली है ये आधा सच है। आधा सच ये है कि अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री पारिवारिक विरासत को आगे बढाने के लिए बनाया गया था। उत्तर प्रदेश में साढे चौदह मुख्यमंत्री थे। साढे चार मुख्यमंत्री परिवार से थे और दस मुख्यमंत्री का काम अदालतों ने किया। सरकार के दर्जनों फैसले ऐसे है जिसको अदालतों ने बदले।

चर्चा के दौरान बोलते हुए ऋतु सिंह ने कहा अखिलेश व शिवपाल दोनों अपनी ताकत को दिखा रहे है। साढे चार साल में कुछ भी काम नहीं हुआ है। ये लोगों के लिए नहीं सिर्फ अपने लिए काम किये है और कर रहे हैं। अखिलेश यादव पहले दिन से ही स्वतंत्र नहीं रहे। भले ही वो मुख्यमंत्री का चेहरा रहे लेकिन वो मुख्यमंत्री नहीं रहे। मुख्यमंत्री हमेशा नेता जी रहे।

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